
रामनवमी के मौके पर डीजे बजाया तो बढ़ेगी मुश्किलें, प्रशासन ने लाउडस्पीकर बजाने पर भी लगाया रोक।
कटिहार में इस बार रामनवमी के जुलूस में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने पर प्रशासन ने बैन लगा दिया है। इस निर्णय के खिलाफ कटिहार जिला लाउडस्पीकर संचालक संघ ने कड़ा विरोध जताया है। उनका आरोप है कि प्रशासन उन्हें जबरन डीजे संचालक बताकर नोटिस दे रहा है और जुलूस में लाउडस्पीकर बजाने पर जुर्माना लगाने की धमकी दे रहा है। लाउडस्पीकर संचालक संघ के मुताबिक, लगभग 200 लाउडस्पीकर संचालकों को रामनवमी के जुलूस में लाउडस्पीकर किराए पर देने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस विवाद के पीछे प्रशासन की सुरक्षा और शांति बनाए रखने की चिंता है, लेकिन लाउडस्पीकर संचालकों का कहना है कि यह निर्णय बिना किसी ठोस कारण के लिया गया है और यह उनके व्यवसाय को सीधे प्रभावित कर रहा है। कटिहार जिला प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि रामनवमी के जुलूस में लाउडस्पीकर और डीजे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, ताकि शांति बनी रहे और आवाज का स्तर नियंत्रित रहे। प्रशासन का मानना है कि तेज आवाज से न केवल स्थानीय लोगों को असुविधा हो सकती है, बल्कि इससे सार्वजनिक शांति भी भंग हो सकती है।
हालांकि, लाउडस्पीकर संचालक संघ का कहना है कि यह निर्णय न सिर्फ उनके व्यवसाय पर असर डाल रहा है, बल्कि यह प्रशासन का एकतरफा निर्णय भी है, जो अन्य आयोजनों पर लागू नहीं होता। कटिहार के कई हिस्सों में सामान्य आयोजनों, जैसे कि विभिन्न सरकारी और निजी कार्यक्रमों, माननीयों और अधिकारियों के घरों में लाउडस्पीकर का उपयोग किया जाता है, लेकिन रामनवमी के जुलूस पर यह प्रतिबंध क्यों? संघ के सदस्यों का कहना है कि जब अन्य
आयोजनों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जा सकता है, तो केवल रामनवमी के जुलूस पर इसे क्यों प्रतिबंधित किया जा रहा है?
इस मुद्दे को लेकर संघ ने प्रशासन से विशेष दिशा-निर्देशों के साथ अनुमति देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन उचित तरीके से जुलूस के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को नियंत्रित करना चाहता है, तो इसे किसी ठोस नियम के तहत अनुमति दी जाए, न कि एकतरफा प्रतिबंध लगाया जाए। लाउडस्पीकर संचालकों का कहना है कि वे हमेशा ही निर्धारित नियमों का पालन करते हैं और वे शांति बनाए रखने के पक्षधर हैं।
संघ के एक सदस्य ने कहा, “हम लोग पूरे साल काम करते हैं और यही हमारी आजीविका का स्रोत है। अगर हमें काम करने से रोका जाएगा, तो हम कैसे अपना परिवार चलाएंगे? हमें प्रशासन से कोई ठोस समाधान चाहिए, ताकि हम अपने व्यवसाय को भी चला सकें और शांति भी बनी रहे।”
वहीं, कुछ आयोजक भी प्रशासन के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि रामनवमी के जुलूस में डीजे और लाउडस्पीकर का परंपरागत रूप से इस्तेमाल किया जाता है और यह धार्मिक उल्लास का एक अहम हिस्सा है। आयोजकों का कहना है कि यदि यह परंपरा नहीं हो पाई तो जुलूस का उत्साह कम हो सकता है।
कटिहार जिला प्रशासन का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है। पुलिस प्रशासन का यह भी कहना है कि अगर लाउडस्पीकर की आवाज का स्तर ज्यादा होता है, तो इससे लोगों को मानसिक और शारीरिक परेशानी हो सकती है, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को। इसके साथ ही, प्रशासन ने यह भी साफ किया कि यह प्रतिबंध अस्थायी है और यदि भविष्य में स्थिति सामान्य रहती है, तो इसे फिर से विचार किया जा सकता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन और लाउडस्पीकर संचालक संघ के बीच इस मुद्दे पर समझौता कैसे होता है। इस विवाद का असर न केवल कटिहार जिले की रामनवमी जुलूस पर पड़ेगा, बल्कि इससे पूरे बिहार राज्य में धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर एक नया परिपेक्ष्य स्थापित हो सकता है। कुल मिलाकर, इस विवाद ने कटिहार में एक नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें सार्वजनिक शांति और धार्मिक उत्सवों के उल्लास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती प्रशासन और आयोजकों के सामने है।