
बिहार की राजधानी पटना में स्थित महावीर मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां हर दिन हजारों लोग भगवान हनुमान के दर्शन करने और प्रसाद चढ़ाने आते हैं। लेकिन हाल ही में इस मंदिर में पूजा-पाठ और नैवेद्यम लड्डू की कीमतों में वृद्धि ने भक्तों को चिंतित कर दिया है। इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या बढ़ती महंगाई के चलते यह आवश्यक था? या फिर भक्तों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है?इसको लेकर लोगो की कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है कुछ लोगो का कहना है की पहले भीड़ में किसी तरह से दर्शन हो जाता था, लेकिन अब हर सेवा के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। यह आम भक्तों के लिए कठिनाई भरा हो गया है।
नैवेद्यम लड्डू तो महावीर मंदिर की पहचान है, लेकिन अब इसकी कीमत 25 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है। अगर परिवार में चार-पांच लोग हैं, तो यह महंगा पड़ जाता है।
वही कुछ लोग कह रहे है की पहले मंदिर में पूजा करवाना सरल था, लेकिन अब विभिन्न पूजाओं की दरें भी बढ़ा दी गई हैं। हवन, अभिषेक और विशेष आरती के लिए अब अधिक पैसे देने पड़ रहे हैं।
इसको लेकर मंदिर प्रशासन अधिकारी का कहना है की मंदिर में बढ़ते रखरखाव और संचालन लागत को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। महंगाई बढ़ रही है, कच्चे माल की कीमतें बढ़ी हैं, और मंदिर को सुचारू रूप से चलाने के लिए हमें यह कदम उठाना पड़ा।
गरीबी को लेकर अधिकारी ने कहा की हम समझते हैं और गरीब भक्तों के लिए कुछ विशेष प्रावधान करने की योजना बना रहे हैं, जैसे कि सप्ताह में एक दिन विशेष रियायती सेवा।
अर्थशास्त्री का कहना है की जब किसी चीज की मांग अधिक होती है और लागत बढ़ जाती है, तो उसकी कीमत भी बढ़ती है। यही नैवेद्यम लड्डू और अन्य सेवाओं के साथ हुआ है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह मूल्य वृद्धि अनिवार्य थी, लेकिन यह देखना होगा कि क्या भक्त इसे स्वीकार कर पाएंगे।
मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक हैं। यदि पूजा-पाठ महंगा होगा, तो यह गरीब श्रद्धालुओं के लिए असुविधाजनक हो सकता है। इससे समाज में असमानता बढ़ सकती है। धार्मिक स्थलों को हमेशा ऐसा प्रयास करना चाहिए जिससे सभी वर्गों के लोग समान रूप से लाभान्वित हो सकें।
इसपे मिठाई विक्रेता का कहना है की देशभर में चीनी, बेसन, घी और ड्राई फ्रूट्स की कीमतें बढ़ी हैं। इससे मिठाइयों की लागत भी बढ़ गई है। मंदिर में नैवेद्यम लड्डू खास तरीके से बनता है, जिसकी शुद्धता बनाए रखने के लिए हमें उच्च गुणवत्ता के सामग्री का उपयोग करना पड़ता है।
नैवेद्यम लड्डू केवल प्रसाद ही नहीं, बल्कि यह भगवान को अर्पित किया जाने वाला विशेष भोग है। इसे तैयार करने की प्रक्रिया में मेहनत और ध्यान लगता है। अगर इसकी गुणवत्ता गिरा दी जाए, तो यह श्रद्धालुओं की आस्था पर प्रभाव डाल सकता है।
आस्था और भक्ति के इस स्थल पर मूल्यवृद्धि ने कुछ सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन यह भी सच है कि मंदिर का संचालन और रखरखाव भी जरूरी है। ऐसे में प्रशासन और भक्तों को मिलकर कोई संतुलित समाधान निकालना होगा। महावीर मंदिर की धार्मिक और सामाजिक भूमिका को बनाए रखते हुए ऐसे कदम उठाने होंगे, जिससे सभी वर्गों के भक्त समान रूप से लाभान्वित हो सकें।